एम.टेक के बाद एसे करें कैरियर की शुरूआत

यदि आपको समझ नहीं आ रहा है कि एम.टेक के बाद  क्या करें। आगे कि पढ़ाई जारी रखे या जॉब करें। आपके करियर के लिए सही विकल्प क्या है। सबसे पहले आप एमटेक की डिग्री प्राप्त करने के बाद मिलने वाले करियर ऑप्शन्स को इस तरह चार प्रमुख हिस्सों में बांटें। 

  • पीएचडी में एडमिशन लेना
  • एमटेक करने के बाद जॉब ज्वाइन कर सकते है
  • एक टीचर के तौर पर किसी इंजीनियरिंग कॉलेज में नौकरी करना
  • अपनी कंपनी शुरु करें

एमटेक के बाद डॉक्टोरल डिग्री (पीएचडी)

यदि आपको बच्चों के साथ अपनी नॉलेज शेयर करना अच्छ लगता है, आप टीचिंग के प्रोफेशन में जाने के लिए इच्छुक है तो आपके करियर के लिए पीएचडी करना बेहतर होगा। एमटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद आप अपने किसी पसंदीदा विषय में पीएचडी कर सकते है। टीचिंग प्रोफेशन बेशक आकर्षक पेशा है लेकिन इसमें काफी चुनौतियां भी आती हैं। इसके लिए आपको पहले से तैयार रहना होगा। यदि आपको किसी रिसर्च एवं डेवलपमेंट कंपनी के साथ काम करना चहते है तो पीएचडी के द्नारा आप आपने सपने को पूरा कर सकते है। भारत में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए, भारत सरकार ने रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन्स (आर एंड डी) और आईआईटीज तथा एनआईटीज जैसी सेंट्रल यूनिवर्सिटीज को मंजूरी दी है। आप अपना ऑब्जेक्टिव को स्पष्ट रखे है तो आप टीचिंग या रिसर्च को अपने करियर ऑप्शन के तौर पर चुन सकते हैं। 

पीएचडी में करें स्पेशलाइजेशन

समाज में पीएचडी को सबसे उच्ची डिग्री माना जाता है। जो लोग पीएचडी कर रहे है उन्हें समाज में  काफी सम्मान मिलता है और सर्वश्रेष्ठ पढ़े-लिखे वक्ति में गिनती होती है। आप एमटेक के बाद डॉक्टोरल स्टडी कर लेते हैं तो इससे भविष्य में आपको बहुत फायदा होगा बशर्ते आपको अपना काम पूरी लगन और जोश के साथ करना होगा। एमटेक में आपके स्पेशलाइजेशन विषय के आधार पर ही पीएचडी में आपका स्पेशलाइजेशन विषय निर्धारित होगा। उदाहरण के लिए, अगर आपने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एमटेक की है तो पीएचडी में आपका स्पेशलाइजेशन का विषय मैकेनिकल इंजीनियरिंग से संबद्ध में होगा। यद्यपि, आपका वास्तविक रिसर्च एरिया अंतिम तौर पर इंस्टिट्यूट कमेटी का संबद्ध विभाग स्टूडेंट्स के नॉलेज बेस और एप्टीट्यूड के आधार पर निर्धारित करता है। 

आजकल, पीएचडी में इंटर-डिसिप्लिनरी अप्रोच काफी लोकप्रिय हो रही है। इसका यह मतलब है कि पीएचडी स्टूडेंट्स एक साथ दो पीएचडी स्पेशलाइजेशन्स चुन सकता है, जहां गाइडेंस के लिए एक से ज्यादा एक्सपर्ट्स की जरूरत पड़ेगी।   

फेलोशिप्स और स्कॉलरशिप्स– एनआईटीज, आईआईटीज और आईआईएससी, बैंगलोर जैसे प्रसिद्ध इंजीनियरिंग इंस्टिट्यूट्स की पीएचडी स्टूडेंट्स के लिए अपनी अलग फंडिंग पॉलिसीज होती हैं। फेलोशिप में रु. 19,000 – रु. 24,000 तक प्रतिमाह दिए जाते हैं। आमतौर पर, इस कोर्स की अवधि 3 वर्ष होती हैं जिसे जरुरत के मुताबिक बढ़ाया भी जाता है। डिपार्टमेंट ऑफ़ इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, डिपार्टमेंट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, यूजीसी, एआईसीटीई और सीएसआईआर पीएचडी स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप्स ऑफर करते हैं। महिला साइंटिस्ट्स के लिए भी अलग स्कॉलरशिप स्कीम्स हैं।

जो स्टूडेंट्स भारत में पीएचडी करना चाहते हैं, इन बातों का ध्यान रखें

  • कोई भी इंस्टिट्यूट चुनने से पहले, आप उस इंस्टिट्यूट की इंफ्रास्ट्रक्चरल फैसिलिटीज और लाइब्रेरी की कंडीशन, इक्विपमेंट्स, लैब्स आदि जैसी अन्य सुविधाओं को अच्छी तरह चेक कर लें।
  • पीएचडी के स्पेशलाइजेशन एरिया के मुताबिक ही एक्सपर्ट्स का चयन करें। अन्यथा, पीएचडी स्टूडेंट और संबद्ध गाइड के बीच अलगाव की स्थिति बन सकती है। 
  • असल में, कोई भी पीएचडी प्रोग्राम एक ओपन-एंडेड प्रोग्राम होता है और यह तब तक पूरा नहीं समझा जाता है जब तक कि स्टूडेंट्स अपना रिसर्च कार्य अच्छी तरह पूरा न करें। इसलिये, आप अपने पीएचडी के पहले वर्ष से ही अपने रिसर्च कार्य को पूरी गंभीरता के साथ करें।

विदेश में करें पीएचडी

जो स्टूडेंट्स विदेश में पीएचडी करना चाहते हैं, उनके भविष्य के लिए काफी अच्छा है।  स्टेनफोर्ड, पिट्टसबर्ग, बर्कले और विस्कॉन्सिन जैसी काफी प्रसिद्ध यूनिवर्सिटीज, जो सभी जरुरी मॉडर्न फैसिलिटीज से पूरी तरह लैस होती हैं। इसलिये, ये यूनिवर्सिटीज आपकी पीएचडी की स्टडी बिना किसी रुकावट के पूरी करने के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकती हैं। विदेश में अपनी पीएचडी स्टडीज करने के लिए, स्टूडेंट्स को टीओईएफएल और जीआरई एग्जाम पास करने पड़ते हैं। इन एग्जाम्स में प्राप्त किये गये स्कोर्स के आधार पर, आप किसी भी फेमस इंटरनेशनल कॉलेज में एडमिशन ले सकते हैं। यह बहुत बढ़िया बात है कि आप किसी इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से अपनी पीएचडी की पढ़ाई करने के बारे में प्लान कर रहे हैं. यद्यपि, कोई इंस्टिट्यूशन चुनते समय आप पूरी सावधानी बरतें और उस इंस्टिट्यूट की क्रेडिबिलिटी एवं एक्रीडिटेशन को डबल चेक करें

एमटेक करने के बाद जॉब ज्वाइन कर सकते है– 

आपको बता दे कि जो स्टूडेंट्स बीटेक करने के बाद, जो जॉब प्रोफाइल मिलती है वही जॉब एमटेक करने के बाद भी मिल सकती है। हालांकि, एमटेक की डिग्री मिलने के बाद आपको टेक्निकल प्वाइंट्स की ज्यादा अच्छी जानकारी और समझ होगी और आप अपने कार्यों के बारे में ज्यादा अच्छी तरह सोच-विचार कर सकेंगे। इसलिए आपके जॉब रोल और पोजीशन को देखते हुए आपको ज्यादा जिम्मेदारियां सौंपी जायेंगी साथ ही आपका सैलरी पैकेज भी काफी अच्छा होगा। रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन्स, मैन्युफैक्चरिंग फर्म्स और आईटी कंपनियों में किसी प्रोजेक्ट मैनेजर, रिसर्च एसोसिएट और सीनियर इंजीनियर्स के तौर पर जॉब प्राप्त कर सकते हैं। 

टीचिंग प्रोफेशन में जॉब करें

आजकल, भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र का बड़ी तीव्र गति से विकास हो रहा है और इस कारण डीम्ड यूनिवर्सिटीज, शिक्षा संस्थानों और कॉलेजों में टीचर्स और प्रोफेसर्स की मांग काफी बढ़ रही है। जो स्टूडेंट्स एमटेक करने के बाद टीचिंग में जाना चाहते हैं, उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उनमें बेहतरीन कम्युनिकेशन और प्रेजेंटेशन स्किल्स अवश्य हो क्योंकि इन दोनों ही स्किल्स का टीचिंग प्रोफेशन में खास महत्व है। इसके अलावा, आपको टीचिंग का शौक भी होना चाहिए और आपको बड़े धैर्य और शांति के साथ अपने स्टूडेंट्स के साथ व्यवहार करना चाहिए। आपको किताबें और जर्नल्स पढ़ने की आदत डालनी होगी ताकि आपको अपने संबद्ध विषय में प्रचलित ट्रेंड्स की पूरी जानकारी हो। आप गेस्ट फैक्लटी के तौर पर भी काम कर सकते हैं। 

अपनी कंपनी शुरू करें

यदी आपके में एंटरप्रेन्योर बनने कि क्लिटी है तो इसे आप एक बेहतरीन करियर ऑप्शन के तौर पर ले सकते है। आपके लिए एक अच्छी खबर है कि एमटेक की डिग्री के आधार पर आपको वेंचर कैपिटलिस्ट्स से फंड और इंवेस्टमेंट्स को लेकर काफी सहायता मिलेगी। उक्त सरकारी संस्थानों के अलावा, शेल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी प्राइवेट कंपनियां भी इंडस्ट्री संबंधी प्रॉब्लम्स में स्पेशलाइजेशन करने वाले पीएचडी स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप उपलब्ध करवाती हैं। इसके अलावा, कई प्राइवेट कंपनियां भी देश में रिसर्च एंड डेवलपमेंट एक्टिविटीज को बढ़ावा देने के लिए इंवेस्टमेंट करके अपना योगदान देती हैं।

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